Tuesday, 8 April 2014

भा ज पा का महिला विरोधी चेहरा बेनकाब।
अपने नये नारे में भाजपा ने नारा दिया है कि नरो के इंद्र नरेंद्र मोदी।
क्या भाजपा के प्रधान मंत्री सिर्फ नरो के वोट चाहते है उन्हें क्या नारियो के वोट नही चाहिए।
भाजपा के  पहले प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी कुंवारे थे।
अब दुसरे ने अपनी पत्नी को दो साल रखने के बाद छोड़ दिया है।
किसी कि बहू - बेटी की जासूसी कराने का मोदी का शौक जग जाहिर है।
ये साफ़ दर्शाता है की भाजपा नारियो को समानता का अधिकार देने के खिलाफ है और ये समाज को पुरुष प्रधान बनाना चाहते और उसे मर्द के पाँव की जूती समझते है।

महिलाओ के विरोधी को
वोट न देना मोदी को 
मोदी का विकास कंहा है ?

"ये तो इलेक्शन के बाद पता चलेगा कि किसके टुकड़े होंगे।"
"जाटो को अपने अपमान का बदला लेने का मौका अब है।"
हर अखबार के हर पेज पर मोदी का बड़ा बड़ा इश्तिआर, हर 15 मिनट बाद हर टीवी चेंनेल पर मोदी का इश्तिआर, हर जनसुविधा शौचालय के बाहर मोदी का इश्तिआर, हर रेड लाइट पर मोदी का इश्तिआर
शायद ये देश नही मोदी के विकास की बात कर रहे थे।
उनके इस विकास के पीछे किसका हाथ है सब जानते है।
जनता को ये समझना होगा की चुनाव के बाद ये पैसा कई गुना होकर जनता की जेब से निकलेगा।
इसलिए आप अपने उम्मीदवार कि काबलियत देखकर वोट दे क्योंकि एक मजबूत विपक्ष भी जरूरी है।   

ये दिल्ली में थपपड़ और मुक्का, वाराणसी में स्याही, गुजरात में लोहे की रोड से हमला, तो एक झलक है उस राजनीति की जो आने वाले दिनों में देश को देखनी पड़ सकती है।  कंही एक दुसरे को धमकी देते नेता, एक दुसरे को काटने की बाते करती रानिया, बदला लेने की बाते करते नेता, यही तो है इनका असली चेहरा।   अगर जनता इनकी मीठी मीठी लोक भावन नारो में आ गयी और इनको जिता दिया तो आने वाला समय दंगो और मानवाधिकार हनन की चरम सीमा को छूएगा और आपको बोलने के भी आजादी नही होगी।  
भावना में बहकर नही 
सोच कर वोट दे 
आखिर वोट है आपका 
और देश भी है आपका    

Friday, 4 April 2014

टी वी सर्वे का कड़वा सच
कल रात न डी टी वी पर एक सर्वे दिया गया उसमे उन्होंने कहा कि उनका सर्वे सबसे ज्यादा भरोसेमंद है।  जब उन्होंने बताया की उन्होंने 154 सीटो के लिए 46354 लोगो का इंटरव्यू लिया था तो मै हैरान रह गया क्योंकि इसका मतलब है की एक लोक सभा सीट के लिए उन्होंने करीब 320 लोगो का इंटरव्यू लिया था जबकि एक लोक सभा सीट पर 16 लाख लोग मतदान करते है।   तो सिर्फ 320 मतदाताओ के कहने पर आप 16 लाख लोगो का रुख कैसे तय करसकते है।  इसका मतलब साफ़ है की कंही न कंही कुछ तो मीडिया का स्वार्थ है।
मतदाताओ को जागरूक होना होगा की ये सब सर्वे झूठ का पुलिंदा है शायद इसीलिए ये पार्टिया गलियो में कार्यकर्ताओ से प्रचार करवाने के बजाय सीधा मीडिया तो पैसे देकर प्रचार करवा रहे है।  चुनाव आयोग तो चाहिए कि इनके टीवी पर प्रचार का टोटल इनके कुल उम्मीदवारो के खर्चे में बराबर बराबर जोड़ दे।   

Thursday, 3 April 2014

घर घर शिक्षा,  जन जन रोटी
जाति धर्म की दीवार न होगी
सब से अच्छे उम्मीदवार को वोट डालो
न कोई कमल न कोई मोदी  

Tuesday, 1 April 2014

शेयर मार्किट में षड्यंत्र 

शेयर मार्किट में निवेशको का पैसा बड़े मगरमच्छो द्वारा पिछले कुछ समय से हड़पा जा रहा है।  CALL/PUT में लोगो का अरबो रुपया हर माह हड़प लिया जाता है।  पहले तो MINI NIFTY बंद कर दी और अब जब हेजिंग के लिए लोग कॉल/पुट खरीदते है तो उनको मार्किट में शेयर के हिसाब से बढ़ाया/घटाया नही जाता नतीजन निवेशक को भारी नुक्सान उठाना पड़ता है। उदहारण के लिए अप्रैल माह में लेनदेन अभी दो दिन पहले ही शुरू हुआ है और आज निफ़्टी की 6700 की पुट 28 % गिरी और कॉल 5 % गिरी जब की मार्किट। 0.32   % बड़ी।   असूलन मार्किट के बढ़ने के साथ इन द मनी कॉल को काफी बढ़ना चाहिए था।   अब जिसने निफ़्टी को शॉर्ट करके हेजिंग के लिए कॉल खरीदी थी वो मारा गया और उसे दो तरफा मार पड़ी।   लगता है की मार्केट फिर एक बार किसी घोटाले की शिकार हो रही है और निवेशको को फिर लूट कर भगा देंगे।  
व्यक्तिवाद, परिवारवाद, एक दूसरे  को शहजादा, हत्यारा, चोर आदि विशेषण  देते नेता, झूठे वायदे देती पार्टिया जाति, धर्म, व्यवसाय आदि के नाम पर वोट डालती जनता - क्या यही है हमारा प्रजातंत्र ?
क्या कोई बतायेगा कि गुजरात का विकास मॉडल क्या है ?
क्या कोई बतायेगा कि कांग्रेस ने अपने पिछले घोषणा पत्र के कितने वायदे पूरे किये है ?
केजरीवाल जी सिर्फ भ्रष्टाचार की बात करने से बात नही बनेगी आप किसतरह की नीतिया अपनायेगे जनता ये जानना चाहती है ?
किसी एक व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाने के लिए बाकी 541 चोर उच्च्के निर्वाचित हो गये तो क्या ?
ईतिहास गवाह है कि जब भी किसी व्यक्ति विशेष को पार्टी से ऊपर मानकर जनता ने वोट दिया है तब तब वो तानाशाह बना है।
वैसे भी एक सक्षम शासक के साथ साथ एक  सशक्त विपक्ष भी प्रजातंत्र में जरूरी है।
इसलिए जिसे भी वोट दे उस उम्मीदवार की काबलियत देखकर दे फिर वो चाहे शासक पार्टी में आये या विपक्ष में बैठे।  अच्छे लोगो की  दोनों ही तरफ जरूरत है।